Tuesday, June 18, 2019

गज़ल

मन उपवन मेरा महक उठा बन के रातरानी,
कुछ पल का साथ तुम्हारा जैसे महके रातरानी।

मेरे दिल की धडकनों से इस कदर जुड़ गए हो,
जैसे गुंथकर हर फूल गजरे मेंं महके रातरानी।।

एहसास तेरे होने का सिखा गया मुझे जीना,
जी रही हूँ अब मैं ऐसे जैसे महके रातरानी।।

तेरी अहमियत क्या है वो तो मैं जानूं,
तुम भरोसा विश्वास मेरा जैसे महके रातरानी।।
                                              मंजु पांगती।

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