Saturday, June 20, 2020

शेखी बाज मक्खी कक्षा 3 पाठ-2

एक जंगल में एक शेर,भोजन कर के  आराम  था  कर  रहा।
मक्खी उड़ती हुई आई,देखा दो दिन से न था  स्नान   किया।।

नींद में था शेर सुन्दर सी,भिनभिनाने  लगी कान  में  मक्खी ।
खलल पड़ने से नींद  में,शेर की तगड़ी डांट मक्खी को पड़ी ।।

दूर हट वर्ना मार डालूंगा,मक्खी बोली छि  इतनी गंदी भाषा ।
गुस्सा आया शेर को अब,मुँह चलाती है भंग कर मेरी  निद्रा ।।

मक्खी बोली क्या करोगे ,आता  है  मुझको  तुम  से  लड़ना।
चुनौती से तिलमिलाया शेर,मारा जोर से अपने कान में पंजा।।

मक्खी तो भागी उड कर, पर कान शेर का थोड़ा छिल गया ।
अब मक्खी नाक में बैठी,फिर नान का भी  वही  हाल  हुआ।।

माथा,गाल कभी गरदन,मक्खी बारी-बारी उन पर जाती बैठ।
मारता शेर तब-तब पंजा, हुआ लहू-लुहान शेर तब घटी ऐंठ ।।

थक कर ऊब गया  शेर,मक्खी से हाथ जोड़ कर माफी मांगी ।
मक्खी बहन छोड़ो अब, मान लिया मैं हारा और  तुम  जीती।।

मद में चूर हो कर मक्खी,उड़ते-उड़ते  अब  आगे  को  बढ़ी ।
राह में हाथी मिला उसे, तो  इतराकर  अपनी  कथा  सुनायी ।।

शेर को हराया है मैने,अब तो जंगल में  मैं  ही राज  करूँगी ।
हाथी प्रणाम करो मुझे,बिन बहस हाथी ने अपनी सूंड उठाई।।

आगे उसे लोमड़ी मिली,फिर वही  बात  मक्खी ने  दुहरायी।
लोमड़ी ने मानी बात,साथ ही मन में मक्खी के आग लगा दी।।

जाले में बैठी थी मकड़ी,भड़क चुकी थी लोमड़ी द्वारा मक्खी।
मद में अंधी मक्खी झपटी,जाले में फंस गई अब खुद मक्खी।।

कोशिशअब बेकार लगी,निकल  न  सकी  हार  गयी  मक्खी।
गर्व करो पर घमंड नहीं, वरना  मक्खी  जैसी   हालत   होगी।।

मंजु पांगती
प्र.अ.रा.प्रा.वि.ग्वालदम (थराली) चमोली









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