Wednesday, June 17, 2020

टिपटिपवा कक्षा 3 पाठ-7

एक दादी और पोते की, चलो आज एक कहानी सुनते  हैं।
पोता रोज कहानी सुनता,दादी रोचक कहानियाँ सुनाती है।।

बरसात का वो मौसम था,हर रोज खूब पानी बरस रहा था।
आज  वर्षा बहुत तेज थी,गाँवअब बहुत दुखी हो चुका था ।।

झोपड़ी पुरानी थी बुढ़िया की, अंदर  पानी  टपक रहा  था।
टप-टप,टप-टप पानी टपका,दादी का मन दुखी हो रहा था।।

पोता  अपनी  जिद पर  था ,सुनाने को कहानी कह रहा था।
दादी तो झुंझला रही  थी ,  अब तक पोता  जिद में ऐंठा था।।

क्या कहानी सुनाऊँ बचवा,दिल में टिपटिपवा का डर है बैठा।
पोता  झट उठ  कर बैठा,पूछा फिर टिपटिपवा होता है कैसा।।

बाघ और शेर से भी बड़ा, दादी जानवर कोई  होता  है क्या।
बाघ आए चाहे आए शेर,ज्यादा डर टिपटिपवा से ही लगता।।

एक बाघ बारिश से बचने,छिपा बैठा था झोपड़ी के ही पीछे ।
सुनकर दादी पोते की बाते,भागा बाघ और डर से छूटे पसीने।।

उसी गाँव में था एक घोबी,बारिश से वह भी  था  बहुत  दुखी ।
गधा गायब था भोर से, ढूंढते-ढूंढते अब  उसकी नजर थकी ।।

बारिश में वो भीग चुका था, अब  सुबह  से लेकर  शाम  हुई ।
बीबी बोली पंडित जी से पूछो,भूत-भविष्य के हैं वो  ज्ञानी ।।

अपना लट्ठा ले  कर  धोबी, पहुंच गया  घर  पंडित  जी  के ।
देखा उसने पंडित जी भी,जमा हुआ वर्षा जल थे उलीच रहे।।

विनती कर के धोबी बोला,खो गया गधा जरा पोथी बांच दो ।
पंडित जी झुंझला कर बोले,जा कर  गड्ढे  पोखर में  ढूंढ  लो।।

डांट खा कर पंडित जी की,दुखी मन धोबी वहाँ से चला गया।
चलते - चलते  वह   धोबी, एक तालाब  किनारे  जा  पहुंचा ।।

ऊँची-ऊँची वहाँ घास उगी थी,धोबी गधे को वहाँ  ढूँढने लगा ।
टिपटिपवा के डर से बदकिस्मत,वह बाघ वहाँ जा  बैठा था ।।

अंधेरा हो चला था  अब  तक, बाघ को गधा समझ बैठा धोबी।
 दे  मारा धोबी ने  लट्ठे  से,बाघ को हमले की ऐसीआस न थी।।

घबरा गया  बाघ  बेचारा,लगा कि टिपटिपवा अब आ ही गया।
जान बचाने की  खातिर ,चुपचाप  धोबी  संग वह  चल दिया।।

कान पकड़े बाघ का धोबी,बढ़  चला  घर  की  ओर  अपने ।
घर  पहुँच  कर  धोबी  ने ,बाँध  दिया  तब  उसको  खूँटे से।।

सुबह लोगों ने  देखा  जब, बाघ घर में  खूँटी से बंधा हुआ था ।
बच्चोंअनदेखे डर के कारण,बाघ अपनी ताकत भूल गया था।।

मंजु पांगती
प्र.अ.रा प्रा.वि.ग्वालदम (थराली)चमोली






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