Thursday, June 18, 2020

बहादुर बित्तो कक्षा 3 पाठ-5

एक किसान बीबी संगअपनी,खुशी से रहता था एक गाँव में ।
बीबी बित्तो थी  बड़ी  सयानी,दिमाग लगाती वह हर काम में ।।

खेत जोत  रहा  था  किसान ,एक दिन है सुबह की यह बात ।
अचानक शेर आ कर बोला,बैल दे-दे मुझको ऐ मानव जात। ।

बैल न देगा तो खाऊँगा तुझे,सोच ले किसान एक बार फिर से।
किसान बहुत गिड़गिड़ाया,इंतजार करो  मैं पूछता हूँ बीबी से।।

पूछा बित्तो ने तुम क्या बोले,कर आया हूँ समझौता शेर से ।
कैसा समझौता चौंकी बित्तो,बैल के बदले गाय को खा ले।।

फटकारा बित्तो ने बेशर्म हो,किसान झेंप गया बुरी तरह से।
घोड़ा ले कर बीबी आ रही,जल्दी जा कर कह दो शेर  से ।।

किसान डर के शेर से बोला,गाय  हमारी  बड़ी  मरियल  है ।
घोड़ा  है एक  मोटा  ताजा,ले कर उसे मेरी बित्तो आ रही है।।

घोड़ा दौड़ाती बित्तो पहुंची,बोली यह तो एक शेर है चार कहाँ।
मालूम तुम्हें होना चाहिए,बिन चार शेर खाये पेट भरता कहाँ।।

यह सुन कर शेर डर गया,समझ न सका औरत है या राक्षसी।
बुरा फंसा मैं तो आज,भागा शेर वहाँ से मति मेरी मारी गयी।।

तब किसान से बित्तो बोली,देख ली आज तुमने मेरी बहादुरी ।
तुम इतने डरपोक हो कैसे,आज तो गवां दी थी गाय  बेचारी ।।

भूख से शेर की आंते सूखी, और थी चेहरे पर  छाई  उदासी ।
क्या बात है भेड़िये ने पूछा,बोला  राक्षसी आज   एक  मिली।।

हैरान हो जाओगे सुन कर,नाश्ता रोज वो चार शेरों का करती।
सुन कर भेड़िया बहुत हंसा,छिप कर देखी थी सारी झलकी ।।

राक्षसी नहीं बित्तो  है  वह,देखो एक कोशिश  फिर से  करो ।।
बैल अगर न हाथ आये ,तो जो चाहो तुम मेरा नाम बदल दो।।

लाख समझाकर माना,बोला पूँछ बाँध कर दोनों साथ चलेंगे।
चले दोनों पूँछ बाँध कर,यह देख किसान के  फिर  हो उड़े।।

बित्तो बिल्कुल न घबरायी,और चीखी जोर  से  दहाड़  लगा।
भेड़िए तूने वादा न निभाया,चार के बदले एक ही शेर लाया।।

सुनते ही शेर के होश उड़े,लगा उसे भेड़िए ने धोखा है दिया।
भेड़िया चिल्लाता रह गया,बिन सुने शेर भागता- भागता रहा।।

बित्तो की हिम्मत रंग लाई,अब शेर कभी  वापस न  आएगा।
बुद्धि और हिम्मत का मेल,जो करेगा सफलता वो ही पाएगा।।

मंजु पांगती
प्र.अ.रा.प्रा.वि.ग्वालदम (थराली)चमोली


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