Friday, June 21, 2019

योगा दिवस

योगा शब्द ही इतना भारी पड़ता,
ऊपर से सरकार का डंडा।

क्या करे सरकारी नौकर बंदा,
मजबूरी बन गई गले का फंदा।

पेट सम्भाले सम्भल नहीं पाता,
फिर भी सूर्य नमस्कार करना पड़ता।

आम जन खून-पसीना रोज बहाता,
फिर भी वह बीमार पड़ जाता।

उसकी बीमारी की जड़ को पकड़ो,
करोड़ों रुपये यूँ ही न खर्चों।

नियमित योगा जो बंदा करता,
योगा दिवस उसी का मनता।

बाकी सब कुछ छलावा है,
 फोटो खींच सत्यापित ही करवाना है।
                              मंजु पांगती
       


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