किस तरह तुमको बताऊँ दर्द अपना निभाएँ,
बाँट दो खुशियाँ गैरों में दर्द अपना निभाएँ।
देखकर तेरी शान ए शौकत तेरी महफिल की तरुन्नुम,
कुछ बेवजह मौतें यहाँ कैसे रोऐं कैसे हंसना निभाएँ।
मुस्कुराहट तेरे लबों की तेरे नैनों की चपलता
जानते हैं मंशा तेरी कैसे कह दें कैसे रहना निभाएँ।
सोए रहो तुम जागती आँखों से प्यारों
हमें बेवफा समझे हो कैसे तुम्हारा जगना निभाएँ।
मंजु पांगती
बाँट दो खुशियाँ गैरों में दर्द अपना निभाएँ।
देखकर तेरी शान ए शौकत तेरी महफिल की तरुन्नुम,
कुछ बेवजह मौतें यहाँ कैसे रोऐं कैसे हंसना निभाएँ।
मुस्कुराहट तेरे लबों की तेरे नैनों की चपलता
जानते हैं मंशा तेरी कैसे कह दें कैसे रहना निभाएँ।
सोए रहो तुम जागती आँखों से प्यारों
हमें बेवफा समझे हो कैसे तुम्हारा जगना निभाएँ।
मंजु पांगती
Shandar didi
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