Wednesday, June 10, 2020

दो पग तो साथ चलो....

इस जीवन की लीला  में, कुछ पल  हमारे  बेहतर  हो,
कुछ तुम बोलो कुछ हम,जरा तुम दो पग तो साथ चलो।

इस  भीषण  दुपहरी  में, जब  हमने  इतने  कष्ट  सहे,
बादल की बरसती  बूँदे,अब  बनकर  तुम  साथ  रहो।

तेरे मेरे की खींच तान में,रिश्तों की ये चादर फट न पड़े,
प्रेम धागा  बन  कर  तुम,तुरपाई रिश्तों की भी कर देना।

कठिन समय जब आए,ठहराव रिश्तों में जब आ जाए,
शीतल बयार  बन  कर,तन मन को पुल्कित  कर देना।

कर्मकाण्ड नहीं जाना मैंने,धर्म जाति नहीं कभी कोई माना,
मैंने बस तुमको जाना  है ,तुम अब साथ  मेरा  निभा  देना।

              मंजु पांगती" मन"मुनस्यारी पिथौरागढ़

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