Sunday, June 14, 2020

गज़ल

कभी गर कह दिया होता कि गम जिंदगी का है।
खुशी कब मिल सकी सबको भरम जिंदगी का है।।

असीमित चाहतों ने ही हमें गुमराह  कर  के यूँ ।
डुबोया इस तरह अवसाद जखम जिन्दगी का है।।

खुशी के मायने  हमको यही  लगते  हमेशा  से।
अमीरी में मिला सबको मरहम जिंदगी का  है।।

बड़े बेचैन होते हम कभी  संतोष  होगा  मन ।
सरलता से जिऐं लम्हात सरगम जिंदगी का है।।

मंजु पांगती" मन"मुनस्यारी पिथौरागढ़ 

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