कभी गर कह दिया होता कि गम जिंदगी का है।
खुशी कब मिल सकी सबको भरम जिंदगी का है।।
असीमित चाहतों ने ही हमें गुमराह कर के यूँ ।
डुबोया इस तरह अवसाद जखम जिन्दगी का है।।
खुशी के मायने हमको यही लगते हमेशा से।
अमीरी में मिला सबको मरहम जिंदगी का है।।
बड़े बेचैन होते हम कभी संतोष होगा मन ।
सरलता से जिऐं लम्हात सरगम जिंदगी का है।।
मंजु पांगती" मन"मुनस्यारी पिथौरागढ़
खुशी कब मिल सकी सबको भरम जिंदगी का है।।
असीमित चाहतों ने ही हमें गुमराह कर के यूँ ।
डुबोया इस तरह अवसाद जखम जिन्दगी का है।।
खुशी के मायने हमको यही लगते हमेशा से।
अमीरी में मिला सबको मरहम जिंदगी का है।।
बड़े बेचैन होते हम कभी संतोष होगा मन ।
सरलता से जिऐं लम्हात सरगम जिंदगी का है।।
मंजु पांगती" मन"मुनस्यारी पिथौरागढ़
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